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(Topics व्यक्ति की असलियत)
दोस्तों जैसे कि आप लोग जानते ही हैं कि व्यक्ति की असलियत का पता कब चलता है जब हमारी लाइफ में बुरा समय आ जाता है तब जाकर कहीं व्यक्ति की असलियत का पता चलता है और आपने देखा होगा कि जब हमारा अच्छा समय चलता है तब हमारे साथ हर कोई खड़ा होता और जैसे ही बुरा समय आ जाता है सब लोग साथ छोड़ देते हैं दोस्तों बुरा समय इंसान की लाइफ में इंसान को वह सब कुछ सिखा देता है जो किसी भी कोई भी किताब नहीं सिखा सकती बुरा समय इंसान को वह सब सिखा देता है और आज का हमारा (topics) इंसान की असलियत के ऊपर है
दोस्तों आज मैं आपको एक छोटी सी कहानी के माध्यम से
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दोस्तों एक समय की बात है एक आदमी एक राजा के पास नौकरी मांगने पहुंचा चपरा जाने उसकी काबिलियत पूछी तो वह बोला मैं जानवर की शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूं राजा ने फिर उसको अपने खास घोड़े की देखभाल करने के लिए प्रभारी बना दिया . फिर कुछ दिन बाद राजा ने अपने मनपसंद घोड़े के बारे में पूछा तो उसने बताया कि महाराज यह घोड़ा ना नस्ली नहीं है राजा को हैरानी हुई और उसने जंगल से घोड़े वाले को बुलाया और पूछा तो वह घोड़े वाला बोला कि घोड़ा नस्ली तो है लेकिन जब घोड़ा पैदा हुआ था तब उसकी मां मर गई थी यह गाय का दूध पीकर पल्ला बड है
राजा ने प्रभारी को बुलाया राजा बोलते हैं कि तुम्हें कैसे पता चला कि घोड़ा नस्ली नहीं है- बाद में बोलता है कि जब यह घास खाता है तो यह गाय की तरह घास खाता है बल्कि नस्ली घोड़ा जब घास खाते हैं तब सिर उठाकर घास खाते हैं राजा उसकी इस बात से बहुत खुश हुआ और उसने उसके घर में अनाज मुर्गा और ढेर सारी बकरियां इनाम के तौर पर भिजवा दी और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया और कुछ दिन बाद राजा ने रानी के बारे में राय मांगी उसने कहा तौर-तरीके तो ठीक है लेकिन लेकिन पैदाइश नहीं है राजा के पैरों तले जमीन खिसक गई उसने अपने सास को बुलाया सास ने कहा कि यह हकीकत है आपके पिता ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था लेकिन हमारी बेटी 6 महीने में ही मर गई थी लिहाजा हमने आपके रजवाड़े से गरीब रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया राजा ने फिर उसको बुलाया और कहा कि तुम्हें कैसे पता चला उसने कहा कि रानी साहिब का नौकरों के साथ सलूक बिल्कुल गवार उसे भी बुरा है एक खानदानी इंसान का दूसरों से बिहार करने का तरीका होता है जो रानी साहिब में नहीं है राजा फिर उसकी पर की नजरों से खुश हुए और फिर से इनाम देकर उन्होंने अपने दरबार में तैनात कर लिया और फिर कुछ दिन बाद राजा ने उससे अपने बारे में पूछा. नौकर ने कहा जान की सलामती हो तो कहूं राजा ने वादा किया तो उसने कहा ना तो आप राजा के बेटे हो और ना ही अब चलन आपका राजाओं वाला है यह बात सुनकर राजा को बहुत गुस्सा आया लेकिन राजा ने उससे वादा किया था राजा गुस्से में सीता अपने मां के महल में पहुंच गया मां ने बात सच है तुम एक चरवाहा के बेटे को हो हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हें गोद लिया था राजा ने फिर उस व्यक्ति से पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला? बताओ उसने कहा जब आप राजा को किसी इनाम देते हो तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं लेकिन आप भेड़ बकरियां खाने पीने की चीजें देते हैं यह अब किसी राजा का नहीं किसी चरवाहा के बेटे का ही हो सकता है
तात्पर्य = यह है कि इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और नियत से होती है
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तो हमारी इस पोस्ट को पढ़ते रहिए गा मिलते हैं नेक्स्ट पोस्ट में (नमस्कार)

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