लक्ष्य का निर्धारण
लक्ष्य का निर्धारण
क्यों पढ़ें :- 50 प्रतिशत लोग लक्ष्य का निर्धारण तो कर लेते हैं पर उसे पुरा नहीं कर पाते है, और उन 50% में आप और मैं भी हुँ।
हम अपने लक्ष्य का चुनाव तो कर लेते हैं कि मुझे क्या प्राप्त करना है पर उन 50% लोगों में से केवल 5% लोग ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाते हैं।
ऐसा इसलिए होता है, कि जैसे ही हम अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर कदम बढ़ाते हैं तभी ही कोई-न-कोई समस्या उत्पन्न हो जाती है और हम हार मान जाते हैं।
मैं भी कई लक्ष्य का निर्धारण करता हुँ, जैसे कि रात को 2 विषय का रिवीजन करूंगा पर जब पढ़ने बैठता हुँ तो आधे घंटे में ही मन उबने लगता है और मैं लक्ष्य से वंचित रह जाता हुँ और वह लक्ष्य बीच में ही अधुरा रह जाता है।
इसका सामाधान इस कहानी में बताया गया है। जिसे पढ़कर आप उन 5% लोगों में शामिल हो सकते हो।
यह कहानी बहुत ही सुंदर तरीके से लिखी गई है जिसके हर एक वाक्य में गहरी शिक्षा छुपी हुई है और खास बात यह है कि यह बहुत ही प्रेरक कहानी है जिसे पढ़कर आप अपने लक्ष्य को दुगने जोश के साथ प्राप्त कर सकते हैं और आखिर में कुछ ऐसे टिप्स भी है जो आपकी सफलता को 10 गुना तक बढ़ा देती है तो कहानी का मजा लीजिए और एक गहरी साँस के साथ इसे पढ़िए।
लक्ष्य का निर्धारण
एक बार की बात है, एक निःसंतान राजा था, समय के साथ वह बुढ़ा हो चुका था और उसे राज्य के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी थी।
योग्य उत्तराधिकारी की खोज के लिए राजा ने पुरे राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि अमुक दिन शाम को जो मुझसे मिलने आएगा, उसे मैं अपने राज्य का एक हिस्सा दूंगा।
राजा के इस निर्णय से राज्य के प्रधानमंत्री ने रोष जताते हुए राजा से कहा, "महाराज, आपसे मिलने तो बहुत-से लोग आएंगे और यदि सभी को उनका भाग देंगे तो राज्य के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। ऐसा अव्यावहारिक काम न करें।"
राजा ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री जी!, आप चिंता न करें, देखते रहें, क्या होता है।"
निश्चित दिन जब सबको मिलना था, राजमहल के बगीचे में राजा ने एक विशाल मेले का आयोजन किया। मेले में नाच-गाने और शराब की महफिल जमी थी, खाने के लिए अनेक स्वादिष्ट पदार्थ थे।
मेले में कई खेल भी हो रहे थे। जिसके कारण राजा से मिलने आने वाले कितने ही लोग नाच-गाने में अटक गए, कितने ही सुरा-सुंदरी में, कितने ही आश्चर्यजनक खेलों में मशगूल हो गए तथा कितने ही खाने-पीने, घूमने-फिरने के आनंद में डूब गए। इस शाम का समय बीतने लगा।
पर इन सभी के बीच एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसने किसी चीज की तरफ देखा भी नहीं, क्योंकि उसके मन में निश्चित ध्येय था कि उसे राजा से ही मिलना है।
इसलिए वह बगीचा पार करके सीधे राजमहल के दरवाजे पर पहुंच गया। पर वहां खुली तलवार लेकर दो चौकीदार खड़े थे। उन्होंने उसे रोका। पर वह रुकने वाला कहाँ था उनके रोकने को अनदेखा करके और चौकीदारों को धक्का मारकर वह दौड़कर राजमहल में चला गया, क्योंकि वह निश्चित समय पर राजा से मिलना चाहता था।
अब जैसे ही वह अंदर पहुंचा, राजा उसे सामने ही मिल गए और राजा ने कहा- "मेरे राज्य में कोई व्यक्ति तो ऐसा मिला जो किसी प्रलोभन में फंसे बिना अपने ध्येय तक पहुंच सका। तुम्हें मैं आधा नहीं पूरा राजपाट दूंगा। तुम ही मेरे उत्तराधिकारी बनोगे।"
वह व्यक्ति खुश हुआ कि वह जिस लक्ष्य से आया था उसका फल मिल गया। वह बिना किसी रुकावट के चक्कर में आये अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा।
कहानी की सीख
उस व्यक्ति का दृढ़ संकल्प ही उसे उसके लक्ष्य पर स्थिरता बनाई रखी।
यह शब्द 'दृढ़ संकल्प' की गहराई को समझने वाला व्यक्ति अपनी मनचाही लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। और प्राप्त भी कर लेता है ठीक उस व्यक्ति की तरह।
जिंदगी खेलती भी उसी के साथ है,
जो खिलाड़ी बेहतरीन होता है।
दर्द सबकी एक से है,
मगर हौसले सबके अलग-अलग है।
कोई हताश होकर बिखर जाता है,
तो कोई संघर्ष करके निखर जाता है
आपको बस यह करना है
1. अपने लक्ष्य को छोटे-छोटे लक्ष्य में बांट दो जिससे कि उसे प्राप्त करने में आसानी हो। मैं भी यही करता हुँ जैसे कि मैं रात को 2 घंटा पढुंगा इसके ब्जाय
मै शाम को एक घंटा पढ़ लूंगा और रात को बचा हुआ फिर एक घंटा पढुंगा।
2. लक्ष्य को पूरा करने के बाद टिक लगा दे
3. जितना भी काम हुआ उसे नोट करें और 3 दिन ऐसा ही करें आप स्वंय देखेंगे कि आपकी सफलता की दर पहले से दोगुनी हो गई है।
4. अपने सुझाव और सवाल मुझे Playstore पर comment करके बताइए जिससे कि इस मैं इस App को आपके लिए और बेहतर कर संकू।
( नई-नई प्रेरक बातें आपसे साझा करने की प्रेरणा मुझे आपसे ही मिलती है। बस आपके एक शेयर (Share On Whatsapp) करने से। )
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